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शनिवार, 4 जून 2011

गाय माता

गाय हमारी माता है, जब तक दूध आता है 

दूध बंद तो घास बंद ,घास बंद तो श्वास बंद 

श्वास बंद देख कर हर कोई नाक चिढ़ाता है 

यूँ गाय हमारी माता है, जब तक दूध आता है 

पूजा मैं  करता हूँ तेरी, जब तक मज़बूरी है मेरी 

कहते हैं तुझे ज़माने से दुःख दर्द सब मिट जाता है

गाय  हमारी माता है, जब तक दूध आता है 

रक्षा  तेरी को संघ घनेरे ,मर जाय  तो सब मुह फेरे 

माँ की किरिया करने वाला, यहाँ नीच कहलाता है 

यूँ गाय हमारी माता है ,जब तक दूध आता है |



बुधवार, 27 अप्रैल 2011

कविता

सिर्फ तुम्हारी 

बैठता  हूँ जब जब 
इंतजारमें मैं तुम्हारे
श्रृंगार का सभी सामन लिये
तुम लाख बुलाने पर भी
नहीं आती तो नहीं आती | 
जब आती हो तो आ जाती हो 
कभी भी कहीं भी अकेले में
मेले में या झमेले में |
झकझोर कर
अपने नरम नरम हाथों से
कन्धों को मेरे कहती हो
  समेट लो मुझे बाहों में अपनी
और करो मेरा श्रृंगार 
जी भर छंद उपमा
और अलंकार से
मैं तुम्हारी हूँ
सिर्फ तुम्हारी  |
                                     अनंत आलोक