शनिवार, 29 अक्टूबर 2011
शुक्रवार, 29 जुलाई 2011
हाइकू
१
आया सावन
नदी नाले जवान
केंचुए उगे |
२
भरी जवानी
सावन बरसता
पिया से दुरी |
३
नदी का शोर
मुरली मनोहर
झूमता मोर |
४
श्याम जलध
नदियाँ उफनती
धरा गगन |
५
साजन दूर
पहला ये सावन
मैं मजबूर |
६
भोर मंदम
रोता दिवस आया
सांझ कीचड़ |
७
धरा नहाये
रोम है हरियाये
जख्म भी खाये|
८
निर्झर शोर
मास काला बेदर्द
हिये न जोर |
९
बाल खेला
जवानी खूब सोया
जीवन खोया |
१०
डडु संगीत
रिमझिम है ताल
नाचे बाल |
आया सावन
नदी नाले जवान
केंचुए उगे |
२
भरी जवानी
सावन बरसता
पिया से दुरी |
३
नदी का शोर
मुरली मनोहर
झूमता मोर |
४
श्याम जलध
नदियाँ उफनती
धरा गगन |
५
साजन दूर
पहला ये सावन
मैं मजबूर |
६
भोर मंदम
रोता दिवस आया
सांझ कीचड़ |
७
धरा नहाये
रोम है हरियाये
जख्म भी खाये|
८
निर्झर शोर
मास काला बेदर्द
हिये न जोर |
९
बाल खेला
जवानी खूब सोया
जीवन खोया |
१०
डडु संगीत
रिमझिम है ताल
नाचे बाल |
शनिवार, 4 जून 2011
गाय माता
गाय हमारी माता है, जब तक दूध आता है
दूध बंद तो घास बंद ,घास बंद तो श्वास बंद
श्वास बंद देख कर हर कोई नाक चिढ़ाता है
यूँ गाय हमारी माता है, जब तक दूध आता है
पूजा मैं करता हूँ तेरी, जब तक मज़बूरी है मेरी
कहते हैं तुझे ज़माने से दुःख दर्द सब मिट जाता है
गाय हमारी माता है, जब तक दूध आता है
रक्षा तेरी को संघ घनेरे ,मर जाय तो सब मुह फेरे
माँ की किरिया करने वाला, यहाँ नीच कहलाता है
यूँ गाय हमारी माता है ,जब तक दूध आता है |
सोमवार, 2 मई 2011
शनिवार, 30 अप्रैल 2011
बुधवार, 27 अप्रैल 2011
कविता
सिर्फ तुम्हारी
बैठता हूँ जब जब
इंतजारमें मैं तुम्हारे
श्रृंगार का सभी सामन लिये
तुम लाख बुलाने पर भी
नहीं आती तो नहीं आती | जब आती हो तो आ जाती हो
कभी भी कहीं भी अकेले में
मेले में या झमेले में |
झकझोर कर अपने नरम नरम हाथों से
कन्धों को मेरे कहती हो
समेट लो मुझे बाहों में अपनी
और करो मेरा श्रृंगार जी भर छंद उपमा
और अलंकार से
मैं तुम्हारी हूँ
सिर्फ तुम्हारी | अनंत आलोक
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