शुक्रवार, 29 जुलाई 2011

हाइकू


आया सावन 
नदी नाले जवान 
केंचुए उगे |



भरी जवानी 
सावन बरसता 
पिया से दुरी |



नदी का शोर 
मुरली मनोहर 
झूमता मोर |



श्याम जलध
नदियाँ उफनती 
धरा गगन |



साजन दूर 
पहला ये सावन 
मैं मजबूर |



भोर मंदम
रोता दिवस आया 
सांझ कीचड़ |

धरा नहाये 
रोम है हरियाये
जख्म भी खाये|



निर्झर शोर
 मास काला बेदर्द 
 हिये न जोर |



बाल खेला 
जवानी खूब सोया 
जीवन खोया |


१०
डडु संगीत 
रिमझिम है ताल 
नाचे बाल |

4 टिप्‍पणियां:

  1. आलोक जी, कुमर छोटा ही होता है। मगर घुसता अन्दर को ही है। कुमर काँडा/अनंत रा हाईकू/सारे हाँडा आलोक जी, कुमर छोटा ही होता है। मगर घुसता अन्दर को ही है। कुमर काँडा/अनंत रा हाईकू/सारे हाँडा

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  2. अति सुन्दर शब्दों का संयोजन,बहुत ही अच्छी हाइकू |

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